पूछरी के लोटा से जतीपुरा जाते समय सुरभि कुंड आता है। इस स्थान का नाम सुरभि गाय के नाम पर पड़ा, जो इंद्र के साथ स्वर्ग से यहाँ आई थी। यहाँ श्री परमानंददासजी का द्वार है।
सुरभि कुंड के सामने श्री गिरिराजजी पर श्री धुका दाऊजी के दर्शन होते हैं। जब श्री दाऊजी यहाँ रहते थे, तब वे अपना मुख नीचे करके पर्वत में छिप जाते थे। श्री ठाकुरजी यहाँ छिपकर लीला के दर्शन करते थे। इस प्रकार उनका नाम धुका दाऊजी पड़ा।
इस मंदिर से श्री गिरिराजजी में 14 कंदराएँ (गुफाएँ) हैं। यहाँ श्री ठाकुरजी गाय चराते समय अपने सखाओं के साथ बैठकर खेलते थे।
सुरभि कुंड के पास श्री बालकृष्णलालजी का एक प्राचीन मंदिर है, जो अत्यंत जर्जर अवस्था में है।