बुखारारी शेषशायी से लगभग पौने चार मील दूर है। यहाँ से पाई गाँव तीन मील दूर है। इस प्रकार कुल दूरी पौने छह मील है। एक बार श्री कृष्ण खेलनावन में अपने मित्रों के साथ खेल रहे थे। उस समय कृष्ण को बहुत भूख लगी। उनके मित्रों ने गाय का दूध दुहा और श्री कृष्ण को अर्पित किया। इसी कारण इस गाँव का नाम “पाई गाँव” पड़ा।
श्री कृष्ण जब दूध पी रहे थे, तब थोड़ा दूध गिर गया। उसी से पाई सरोवर बनाया गया। यहाँ एक सुंदर कदमखंडी है। यह झील वृक्षों के बीच स्थित है। यहाँ गोपालकुंड और गोपीकुंड नामक दो कुंड हैं। गोपालकुंड पर श्री राधारमणजी का मंदिर है और गाँव में श्री चतुर्भुजजी और श्री दौजी के मंदिर हैं। यह चतुरंग का जन्मस्थान है।
फालेन:
यह गाँव कोसी से पाई गाँव जाते समय बीच में पड़ता है। यहाँ फागुन सुद पूनम को होलिका दहन का एक विशाल मेला लगता है। इसे देखने के लिए बहुत से लोग आते हैं।