वी.एस. 1919, श्रावणवाद 11
वे एक महान विद्वान थे और सेवाभाव में लीन रहते थे। साहित्य और संगीत उनके दो विशेष शौक थे।
श्री गोवर्धनलाल जी की प्रसिद्धि समस्त संप्रदाय में सर्वविदित है। उनका जोर सेवा और स्मरण दोनों पर था। वे अपने जीवनकाल में नियमित रूप से सुबोधिनी जी का पाठ करते रहे। वैष्णवों को भी स्वतंत्र रूप से दर्शन की अनुमति थी। गोव शिघ्र कवि पंडित नंदकिशोर जी, गोव देवऋषि पंडित रामनाथ शास्त्री जी आदि को वे अपने साथ ले जाते थे। ज्ञान विभाग ने ग्रंथों के प्रकाशन और क्षेत्रीय परीक्षाओं के आयोजन पर पर्याप्त धन खर्च किया।