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श्री महाप्रभुजी

जन्म तिथि:

विक्रम संवत 1500 के चैत्र महीने के कृष्ण पक्ष के ग्यारहवें दिन

जन्म स्थान:

भारत में चंपारण्य नामक वन में।

इंतकाल:

विक्रम संवत 1587 में रथयात्रा के दिन 52 वर्ष की आयु में वे गंगा नदी में प्रवेश कर गए और प्रकाश का एक उज्ज्वल पिंड सूर्य में विलीन हो गया और संसार से विलीन हो गया।

परिवार:

उनके पिता का नाम लक्ष्मण भट्ट और माता का नाम श्री इल्लम्मागरु था। भारत के एक धर्मनिष्ठ और सुशिक्षित ब्राह्मण समुदाय के रूप में माने जाने वाले वेल्लनातीय समुदाय में जन्मे, उनका गोत्र भारद्वाज और सूत्र आपस्तम्भ था। उनके पूर्वज कृष्ण यजुर्वेद की तैत्तिरीय शाखा का अध्ययन करते थे। उनके दो पुत्र थे। बड़े पुत्र का नाम श्री गोपीनाथजी और छोटे पुत्र का नाम श्री विट्ठलनाथजी (जो श्री गुसाईजी के नाम से लोकप्रिय थे) था।