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19 Dec, 2025

August 2011

हरेर्दास्यं धर्मः उस रोज मंदिर में हुई सभा में एक भाई नें प्रश्न रखा था कि ‘ब्रह्म सम्बन्ध दीक्षा लिए बिना यदि कोई भगवत्सेवा करता हो तो क्या ऎसी सेवा भगवान् स्वीकार नहीं करेंगे ?’ मैंने उत्तर दिया था कि ‘आप सेवा करते हो’ इस पर उन्होंने पुनः प्रश्न पूछा कि ‘इसका मतलब तो यह […]

by pusti

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19 Dec, 2025

July 2011

जो मोक्ष को भी एक झंझट मानकर केवल भक्ति ही निरंतर करते रहना चाहते हों उन्हें पुष्टिभक्त समझना चाहिए. अतएव वृत्रासुर कहता हैः न नाकपृष्ठं न च पारमेठयम्                                             न सार्वभौमं न रसाधिपत्यम् ।                                             न योगसिद्धिः अपुनर्भवं वा                                             समंजस त्वा विरहय्य कांक्षे । न मुझे स्वर्ग चाहिए और न ब्रह्मा की पदवी ही. न […]

by pusti